भारत में बढ़ती गर्मी और चरम मौसम ने स्कूली शिक्षा को बाधित कर दिया है। कई राज्यों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल के समय में बदलाव या गर्मी की छुट्टियां पहले कर दी हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन से शिक्षा में असमानताएं गहरी होती जा रही हैं।
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- ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों ने स्कूल का समय सुबह जल्दी किया।
- छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल ने बच्चों की सुरक्षा के लिए छुट्टियां जल्दी घोषित कीं।
- 2024 में जलवायु संकट से दुनिया भर में 242 मिलियन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, भारत में 54.8 मिलियन।
- दिल्ली-एनसीआर में धुंध और प्रदूषण के कारण सर्दियों में स्कूल कई हफ्तों तक बंद।
- कर्नाटक, असम, मेघालय जैसे राज्यों में बाढ़ से हर साल हजारों स्कूल क्षतिग्रस्त।
- बाढ़ के बाद किताबें, यूनिफॉर्म खोने और पारिवारिक मदद के कारण बच्चे स्कूल नहीं लौट पाते।
- खराब वायु गुणवत्ता और अधिक गर्मी से बच्चों की पढ़ाई और स्मृति पर नकारात्मक असर।
- सबसे ज्यादा असर गरीब, ग्रामीण, विकलांग और वंचित वर्ग के बच्चों पर।
- स्कूल में मिड-डे मील योजनाएं भी बाधित, गरीब बच्चों की शिक्षा पर भारी असर।
- विशेषज्ञों ने किया आह्वान: जलवायु-प्रतिरोधी स्कूल, डिजिटल शिक्षा, वित्तीय मदद की जरूरत।





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