2025 में भारतीय परिवारों का निवेश व्यवहार तेजी से बदल रहा है। Bain & Company और Groww की How India Invests 2025 रिपोर्ट दिखाती है कि लोग पारंपरिक बैंक जमा की जगह बाजार आधारित साधनों—खासकर म्यूचुअल फंड और इक्विटी—को तेजी से अपना रहे हैं, खासकर छोटे शहरों में।
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- भारतीय परिवार पारंपरिक जमा से हटकर बाजार-आधारित निवेश की ओर; MF व इक्विटी सबसे तेज़ बढ़ने वाली एसेट क्लास।
- MF+इक्विटी का हिस्सा अभी सिर्फ 15–20%; अमेरिका/कनाडा के 50–60% की तुलना में बड़ी ग्रोथ संभावना।
- अगले 10 वर्षों में MF AUM ₹300 लाख करोड़ पार करेगा; मुख्य जोर B30 शहरों से नई पैठ पर।
- डायरेक्ट इक्विटी होल्डिंग्स ₹250 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान; शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग से लॉन्ग-टर्म निवेश की ओर बदलाव।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दबदबा: 80% नए इक्विटी निवेशक व 35% MF निवेशक ऑनलाइन चैनलों से जुड़े।
- MF पैठ 5–6% से बढ़कर 10–11% हुई; अगले दशक में ~20% होने की उम्मीद।
- सैलरीड लोग SIP में अधिक निवेश; बिज़नेस ओनर्स डायरेक्ट इक्विटी में अधिक; Gen Z अधिक रिएक्टिव, Gen X स्थिर।
- पिछले पाँच वर्षों में डीमैट अकाउंट्स 5× बढ़े; पोस्ट-पैंडेमिक IPO बूम और डिजिटल सुविधा का बड़ा प्रभाव।
- FY25 में भारतीय घरेलू संपत्ति ₹1,300–1,400 लाख करोड़; पाँच वर्षों में 13% वृद्धि।
- आगे की ग्रोथ को नियामकीय समर्थन, रिटायरमेंट स्कीम्स, MF का मजबूत प्रदर्शन और बढ़ता डिजिटल वितरण तेज करेगा।





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