भारत और यूएई के संबंध एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में विकसित हो चुके हैं, जिसमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल और संपर्क सहयोग प्रमुख स्तंभ हैं। 20 जनवरी 2026 को प्रकाशित संपादकीय के अनुसार, CEPA के तहत FY 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार USD 100 बिलियन पार कर गया है और 2032 तक USD 200 बिलियन का लक्ष्य तय किया गया है। हालिया रक्षा, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा समझौते इस साझेदारी की गहराई को दर्शाते हैं।
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- भारत–यूएई संबंध लेन-देन आधारित ढांचे से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी बने हैं, जिसमें प्रवासी भारतीय समुदाय, आर्थिक एकीकरण और क्षेत्रीय स्थिरता साझा हितों के प्रमुख आधार हैं।
- CEPA के तहत द्विपक्षीय व्यापार FY 2024–25 में USD 100 बिलियन पार कर गया, जिससे यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना, और दोनों देशों ने 2032 तक USD 200 बिलियन व्यापार का लक्ष्य रखा है।
- जनवरी 2026 में रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें रक्षा विनिर्माण, सैन्य इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त अभ्यास शामिल हैं।
- ऊर्जा सहयोग कच्चे तेल से आगे बढ़कर दीर्घकालिक LNG आपूर्ति, परमाणु ऊर्जा, SMR, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन तक विस्तारित हुआ है।
- UPI–AANI और RuPay–JAYWAN एकीकरण से डिजिटल भुगतान और प्रेषण आसान हुए हैं, जिससे 35 लाख प्रवासी भारतीयों को लाभ मिला और डिजिटल वित्तीय संपर्क मजबूत हुआ।
- अवसंरचना सहयोग अब ग्रीनफील्ड परिसंपत्ति निर्माण पर केंद्रित है, जिसमें बंदरगाह, औद्योगिक गलियारे और IMEC से जुड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क शामिल हैं।
- अंतरिक्ष सहयोग लॉन्च सेवाओं से आगे बढ़कर सह-विकास मॉडल में बदल गया है, जहां दोनों देश वाणिज्यिक प्रक्षेपण सुविधाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर काम कर रहे हैं।
- प्रगति के बावजूद व्यापार घाटा, IMEC की क्षेत्रीय अस्थिरता, स्थानीय मुद्रा निपटान, एमिरातीकरण नीति और निवेश क्रियान्वयन में देरी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
- निवेश सुविधा, रक्षा सह-उत्पादन, कौशल मान्यता और हरित समुद्री गलियारे जैसे उपायों से रणनीतिक लक्ष्यों को व्यवहारिक परिणामों में बदलने पर जोर दिया जा रहा है।





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