8 मई 2025 को वित्त मंत्रालय ने जलवायु वित्त टैक्सोनॉमी का मसौदा जारी किया। इसका उद्देश्य टिकाऊ आर्थिक गतिविधियों को परिभाषित करना है ताकि जलवायु लक्ष्यों के लिए आवश्यक निवेश आकर्षित किया जा सके। यह हरित धोखाधड़ी को रोकने और फंड के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने का प्रयास है।
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- भारत का लक्ष्य 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन
- 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी का लक्ष्य
- लक्ष्य प्राप्ति के लिए चाहिए लगभग $2.5 ट्रिलियन निवेश
- टैक्सोनॉमी से जलवायु-अनुकूल व संक्रमणकारी गतिविधियों की पहचान होगी
- इस्पात, सीमेंट, बिजली, परिवहन, भवन, कृषि, जल क्षेत्र पर विशेष फोकस
- ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और उत्सर्जन घटाने में मदद करेगा मसौदा
- स्पष्ट परिभाषाएं हरित धोखाधड़ी को रोकेंगी
- EU, UK, सिंगापुर जैसे देशों की नीति मॉडल पर आधारित
- मसौदे पर राय देने की अंतिम तिथि 25 जून 2025
- अंतिम दस्तावेज़ में सेक्टर-विशिष्ट गतिविधियां और सिद्धांत शामिल होंगे





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