भारत और नीदरलैंड्स ने नई हाइड्रोजन फेलोशिप और शैक्षणिक समझौतों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा सहयोग बढ़ाया, जिससे हरित हाइड्रोजन अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बल मिला।
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भारत–नीदरलैंड्स हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किया गया, जिससे भारतीय शोधकर्ताओं को नीदरलैंड्स के उन्नत हाइड्रोजन इकोसिस्टम का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
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यह कार्यक्रम पीएचडी शोधार्थियों, पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ताओं और फैकल्टी सदस्यों के लिए है, जिसमें सिस्टम इंटीग्रेशन और सुरक्षा मानकों पर जोर दिया गया है।
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फेलोशिप का उद्देश्य अनुसंधान परिणामों को भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्राथमिकताओं और कठिन औद्योगिक क्षेत्रों की आवश्यकताओं से सीधे जोड़ना है।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन और 19 आईआईटी के बीच दीर्घकालिक हाइड्रोजन अनुसंधान सहयोग हेतु समझौता कराया।
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समझौते के तहत फैकल्टी एवं छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान और ज्ञान साझा करने की व्यवस्था होगी, बिना किसी स्वचालित वित्तीय दायित्व के।
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यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, ऊर्जा स्वतंत्रता 2047 और नेट-जीरो 2070 लक्ष्यों के अनुरूप है।
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हाइड्रोजन अवसंरचना में नीदरलैंड्स की विशेषज्ञता से वैश्विक हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका मजबूत होगी।





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