भारत अगले पाँच दशकों में चंद्रमा पर एक वैज्ञानिक बेस स्थापित कर सकता है। यह बात फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL) के निदेशक अनिल भारद्वाज ने शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित ‘जियोकॉन-2026: सस्टेनेबल एनवायरनमेंट फॉर जियोसाइंस एंड क्लाइमेट चेंज’ सम्मेलन के दौरान कही। उन्होंने भारत के चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम के भविष्य और आने वाले मिशनों की जानकारी भी साझा की।
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- अगले 50 वर्षों में चंद्रमा पर भारत का वैज्ञानिक बेस स्थापित होने की संभावना।
PRL निदेशक अनिल भारद्वाज ने लखनऊ विश्वविद्यालय के जियोकॉन-2026 सम्मेलन में दी जानकारी।
- चंद्रयान-4 मिशन 2028–29 के आसपास लॉन्च होने की संभावना।
- मिशन का लक्ष्य चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाना।
- नमूनों से चंद्रमा की संरचना और भूवैज्ञानिक इतिहास का विस्तृत अध्ययन संभव।
- चंद्रयान-3 के अध्ययन में अंटार्कटिका में मिले ALH 81005 उल्कापिंड से समानताएँ पाई गईं।
- PRL, ISRO के उपग्रह और ग्रह मिशनों के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान व उपकरण विकसित करता है।
- ISRO का SpaDeX मिशन कक्षा में दो उपग्रहों की सफल डॉकिंग तकनीक का प्रदर्शन कर चुका है।
- यह तकनीक भविष्य के स्पेस स्टेशन, अंतरिक्ष यान रिफ्यूलिंग और जटिल मिशनों के लिए महत्वपूर्ण।
- चंद्रयान-5 मिशन चंद्रमा के स्थायी छायादार ध्रुवीय क्षेत्रों की खोज करेगा, जहाँ जल-बर्फ के संकेत मिल सकते हैं।
- भविष्य में क्रूड ऑर्बिटर मिशन, 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री की चंद्रमा पर लैंडिंग और बाद में वैज्ञानिक बेस की योजना।





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