भारत ने ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंसिंग सिस्टम (ONDLS) शुरू किया है ताकि दवाओं में उपयोग होने वाले सॉल्वेंट्स की वास्तविक समय में निगरानी हो सके। यह कदम ज़हरीली खांसी की दवाओं से हुई बच्चों की मौतों के बाद उठाया गया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) इस डिजिटल प्रणाली की देखरेख करेगा।
• नया ONDLS उच्च जोखिम वाले फार्मा सॉल्वेंट्स की रियल-टाइम ट्रैकिंग करेगा।
• मध्य प्रदेश में DEG मिश्रित खांसी की दवाओं से बच्चों की मौत के बाद कदम।
• DEG एक जहरीला औद्योगिक सॉल्वेंट है, कई बार भारत में विषाक्तता की घटनाएँ हुईं।
• प्रणाली केवल प्रमाणित, औषधि-ग्रेड सामग्री के उपयोग को सुनिश्चित करेगी।
• ग्लिसरीन, प्रोपिलीन ग्लाइकोल, सोर्बिटोल, माल्टिटोल, एथिल अल्कोहल, स्टार्च हाइड्रोलाइसेट की निगरानी अनिवार्य।
• सभी लाइसेंसधारी सॉल्वेंट निर्माताओं को बैच-वार डेटा अपलोड करना होगा।
• पुरानी लाइसेंस प्रबंधन और गुणवत्ता दस्तावेज़ अपलोड की नई सुविधा जोड़ी गई।
• राज्य औषधि नियंत्रक निरीक्षण, ऑडिट और जागरूकता कार्यक्रम करेंगे।
• CDSCO ने 22 अक्टूबर 2025 को सर्कुलर जारी किया, स्वास्थ्य सचिव की समीक्षा से समर्थित।
• उद्देश्य — दवा सुरक्षा, जवाबदेही और वैश्विक भरोसे को मजबूत करना।





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