भारत और इंडोनेशिया ने ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर के पुनर्स्थापन के लिए हाथ मिलाया है, जिससे सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे और वैश्विक हिन्दू विरासत संरक्षित रहेगी।
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- भारत और इंडोनेशिया ने प्रम्बानन मंदिर परिसर के पुनर्स्थापन हेतु संयुक्त पहल की घोषणा की, जो गहरे सभ्यतागत संबंधों और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के योग्याकार्ता में स्थित देश का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया की समृद्ध धार्मिक और स्थापत्य विरासत का प्रतीक है।
- यह मंदिर नवमी शताब्दी में संजय वंश द्वारा निर्मित किया गया था और हिन्दू त्रिमूर्ति शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है।
- इस मंदिर को स्थानीय रूप से रोरो जोंग्रांग या पतली कन्या का मंदिर कहा जाता है, जो क्षेत्रीय लोककथाओं और पारंपरिक जावानी संस्कृति से जुड़ा हुआ है।
- वर्ष उन्नीस सौ इक्यानवे में इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त हुआ, जिससे इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य महत्ता वैश्विक स्तर पर स्थापित हुई।
- इस परिसर में लगभग दो सौ चालीस मंदिर हैं, जो उत्कृष्ट शिल्पकला और जावानी तथा दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैलियों के सुंदर समन्वय को दर्शाते हैं।
- मुख्य परिसर में आठ प्रमुख और आठ छोटे मंदिर ऊँचे मंच पर निर्मित हैं, जिनकी दीवारों पर रामायण सहित विभिन्न कथाओं की विस्तृत नक्काशी की गई है।
- शिव मंदिर लगभग सैंतालीस मीटर ऊँचा है, जिसके दोनों ओर विष्णु और ब्रह्मा मंदिर स्थित हैं, जो एक भव्य और संतुलित स्थापत्य संरचना प्रस्तुत करते हैं।





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