भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा 2026 में 100 अरब डॉलर से अधिक होने की संभावना है, जो बढ़ते आयात और संरचनात्मक निर्भरता को दर्शाता है।
BulletsIn:
- भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा अप्रैल से फरवरी अवधि में लगभग 102 अरब डॉलर पहुंचा, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर दर्ज हुआ
- चीन से आयात लगभग 119–120 अरब डॉलर तक पहुंचा, जबकि निर्यात केवल करीब 17.5 अरब डॉलर रहा, जिससे बड़ा असंतुलन बना
- बढ़ता घाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन और औषधि सामग्री जैसे क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता के कारण हो रहा है
- भारत के उद्योगों के लिए आवश्यक कई महत्वपूर्ण पुर्जे और उपकरण अभी घरेलू स्तर पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं
- चीन को निर्यात में वृद्धि के बावजूद आयात की तेज वृद्धि के कारण व्यापार अंतर लगातार बढ़ रहा है
- चीन द्वारा सख्त नियम और मानक भारतीय उत्पादों के प्रवेश को सीमित करते हैं, जिससे व्यापार संतुलन प्रभावित होता है
- विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ता घाटा आर्थिक निर्भरता को दर्शाता है, जिसे कम करने के लिए घरेलू उत्पादन और आपूर्ति विविधीकरण जरूरी है





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