भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते के साथ रक्षा-सुरक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए।
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भारत और यूरोपीय संघ ने पहली बार व्यापक रक्षा और सुरक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए, जो पारंपरिक व्यापार आधारित सहयोग से परे बढ़ते रणनीतिक विश्वास को दर्शाता है।
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यह समझौता समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग, उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियां, अंतरिक्ष सुरक्षा, साइबर खतरों और आतंकवाद रोधी सहयोग जैसे व्यापक क्षेत्रों को कवर करता है।
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यह साझेदारी 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान यूरोपीय नेताओं के भारत दौरे के अवसर पर की गई, जो राजनीतिक और रणनीतिक जुड़ाव को मजबूत करती है।
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भारत और EU ने “सूचना सुरक्षा समझौते” पर बातचीत शुरू की, जो संवेदनशील जानकारी के सुरक्षित आदान-प्रदान और कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
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यह समझौता हाइब्रिड युद्ध, अंतरराष्ट्रीय अपराध, साइबर हमले और इंडो-पैसिफिक एवं यूरोपीय क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी नई चुनौतियों को संबोधित करता है।
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नेताओं ने “Towards 2030 India–EU Joint Comprehensive Strategic Agenda” को अपनाया, जो सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, सतत विकास, कनेक्टिविटी और जन-जन संबंधों के लिए दीर्घकालिक रोडमैप प्रदान करता है।
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ReArm Europe और Readiness 2030 के तहत यूरोपीय रक्षा विस्तार से भारत के बढ़ते रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए निर्माण और आपूर्ति अवसर खुलते हैं।
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यह साझेदारी भारत और EU को दीर्घकालिक सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करती है, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, वैश्विक स्थिरता और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध हैं।





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