2018 से 2025 तक अमेरिका की बढ़ती टैरिफ़ नीतियों ने वैश्विक बाज़ारों को प्रभावित किया, जिसका असर भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। भारत के $48–52 अरब के कृषि निर्यात क्षेत्र को झटके मिले, लेकिन इसी के साथ कुछ अवसर भी बने—विशेष रूप से बाज़ार विविधीकरण और व्यापार-विमुखता (trade diversion) के जरिए।
BulletsIn :
* 2018–2025 में अमेरिकी टैरिफ़ बढ़ोतरी ने कृषि समेत वैश्विक बाज़ारों को प्रभावित किया
* भारत के कृषि निर्यात (11% merchandise exports) को सीधा असर
* US टैरिफ़ से भारतीय कृषि उत्पादों की लागत बढ़ी → बाज़ार पहुंच घटी
* 2018 में भारत के जवाबी टैरिफ़ से अमेरिकी बादाम, सेब, नट्स निर्यात को नुकसान
* मुख्य प्रभाव: राजस्व में गिरावट, फॉर्मगेट कीमतों में कमी, इनपुट लागत में बढ़ोतरी
* धातु/मशीनरी पर टैरिफ़ से कोल्ड-चेन, पैकेजिंग, सिंचाई उपकरण महंगे
* व्यापार-विमुखता से मसाले, प्रोसेस्ड फूड, कुछ बागवानी उत्पादों में लाभ
* बाज़ार विविधीकरण: पश्चिम एशिया, अफ्रीका, ASEAN, EU में निर्यात बढ़ा
* कच्चे माल की जगह वैल्यू-ऐडेड खाद्य निर्यात अधिक टिकाऊ
* गुणवत्ता सुधार, कोल्ड चेन, ट्रेसेबिलिटी, SPS मानकों का पालन निर्यात मज़बूत करता है
* कूटनीति: WTO, बातचीत, दीर्घकालिक फ्रेमवर्क से अनिश्चितता घटती है
* कुल प्रभाव मिश्रित — कुछ अवसर, पर उच्च अस्थिरता और निवेश में देरी के नुकसान भी





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.