अस्पृश्यता, जो भारतीय संविधान द्वारा प्रतिबंधित है, फिर भी विभिन्न रूपों में बनी हुई है। डॉ. भीमराव आंबेडकर के अनुसार, अस्पृश्यता की उत्पत्ति न तो जातीय थी और न ही पेशेवर। उनका शोध इतिहासिक और सामाजिक संदर्भ को उजागर करता है, जिसमें उन्होंने बताया कि अस्पृश्यता का उदय ब्राह्मणों द्वारा मांसाहार छोड़ने से जुड़ा था।













