भारत में सोने के बदले ऋण की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इस क्षेत्र में अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।
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- सोने के ऋण में तेज़ी: सितंबर 2024 तक समाप्त वर्ष में सोने के ऋण में भारी वृद्धि हुई।
- RBI ने अनियमित प्रथाओं पर ध्यान दिलाया, जिनमें मूल्यांकन, उचित परिश्रम, और ऋण उपयोग की निगरानी में खामियां शामिल हैं।
- सितंबर 30, 2024 को जारी निर्देशों में RBI ने नीतियों और प्रक्रियाओं की समीक्षा का आदेश दिया।
- NBFC का प्रभुत्व: मार्च 2024 तक कुल सोने के ऋण का 59.9% हिस्सा NBFC के पास।
- NBFCs, सोने के गहनों के बदले ऋण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
- अन्य ऋण श्रेणियों जैसे व्यक्तिगत और माइक्रोफाइनेंस में वृद्धि धीमी पड़ी।
- SHG और माइक्रोफाइनेंस ऋण की वृद्धि दर पिछले साल की तुलना में दो-तिहाई कम हुई।
- RBI के दिशानिर्देश पारदर्शिता और टिकाऊ वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए।
- आर्थिक बदलाव दर्शाते हैं कि वित्तीय जरूरतों के लिए उधारकर्ता सुरक्षित ऋण पर निर्भर हो रहे हैं।





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