दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली सचिवालय सभागार में बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन कार्यशाला का उद्घाटन किया, जिसमें वैज्ञानिक निपटान पर जोर दिया गया।
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- दिल्ली में रोज़ाना 31.2 मीट्रिक टन बायोमेडिकल कचरा उत्पन्न होता है।
- शहर में दो ट्रीटमेंट प्लांट, कुल 62.8 मीट्रिक टन/दिन की क्षमता।
- अवैध निपटान रोकने के लिए नियमित निगरानी, ऑडिट और सुविधा विस्तार जरूरी।
- गलत छंटाई से गैर-खतरनाक कचरा भी खतरनाक हो सकता है।
- मंत्री ने बायोमेडिकल वेस्ट नियम, 2016 का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया।
- कचरे की खराब हैंडलिंग से वायु, जल और यमुना नदी प्रदूषित होती है।
- 20 सरकारी अस्पतालों को बेहतर कचरा प्रबंधन के लिए सम्मानित किया गया।
- स्वामी दयानंद अस्पताल और बुराड़ी अस्पताल को उच्च मानकों के लिए सराहा गया।
- मंत्री ने कचरा प्रबंधन के लिए एक संसाधन पुस्तक जारी की।
- सरकार अस्पतालों को जिम्मेदार निपटान में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध।





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