18वीं सदी में मुगलों की शक्ति कमजोर हुई और प्रांतीय गवर्नरों ने स्वतंत्रता का दावा किया। इसने बंगाल, अवध, हैदराबाद, मैसूर, मराठा, सिख, राजपूत और जाट जैसे क्षेत्रीय राज्यों के उदय को जन्म दिया। ये राज्य शक्ति के विकेंद्रीकरण का प्रतीक बने, हालांकि अधिकांश ने मुगल प्रणालियों का उपयोग जारी रखा।
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- 1761 तक मुगल शक्ति ढह गई
- गवर्नर, जमींदार बने स्वायत्त शासक
- बंगाल, अवध, हैदराबाद बने उत्तराधिकारी राज्य
- मराठा, सिख, जाट बगावत से उभरे
- राजपूतों ने स्वतंत्रता पाई, क्षेत्रों का विस्तार किया
- हैदर अली-टीपू के नेतृत्व में मैसूर प्रमुख शक्ति
- निज़ाम आसफ जाहा के अधीन हैदराबाद सशक्त
- खालसा के तहत सिखों ने पंजाब में आधार बनाया
- जाटों ने भरतपुर व व्यापारिक केंद्र स्थापित किए
- आर्थिक गिरावट रोकने में सभी असफल रहे





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