भारत के राष्ट्रपति केवल औपचारिक पदाधिकारी नहीं हैं। सभी प्रमुख निर्णय राष्ट्रपति के नाम से लिए जाते हैं, लेकिन अधिकांश निर्णय मंत्रिपरिषद की बाध्यकारी सलाह (अनुच्छेद 74) पर आधारित होते हैं। फिर भी, कुछ विशेष स्थितियों में राष्ट्रपति स्वतंत्र रूप से विवेकाधीन शक्तियों का उपयोग कर सकते हैं।
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- राष्ट्रपति सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं, अनुच्छेद 74
- विवेकाधीन शक्तियाँ संविधान में सीधे नहीं लिखी, प्रावधानों से निकाली जाती हैं
- निलंबन वीटो: विधेयक (धन विधेयक नहीं) संसद को पुनर्विचार हेतु लौटाना
- पॉकेट वीटो: विधेयक अनिश्चित काल तक लंबित रखना, कोई समय सीमा नहीं
- अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री से सूचना मांगने का अधिकार
- अनुच्छेद 85 के तहत संसद का आह्वान करने का अधिकार
- लोकसभा में बहुमत न होने पर किसे सरकार बनाने बुलाना, राष्ट्रपति का विवेक
- विश्वास खोने पर लोकसभा या मंत्रिपरिषद भंग करने का निर्णय राष्ट्रपति का
- कार्यवाहक सरकार: राष्ट्रपति केवल दैनिक प्रशासनिक कार्य तय करते हैं
- गैर-विवेकाधीन शक्तियाँ: आपातकाल घोषित करना, राज्यपाल, न्यायाधीश, सेना प्रमुख, चुनाव आयुक्त नियुक्त करना, अपराधियों को क्षमा या दंड कम करना





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