Madras High Court ने स्पष्ट किया कि Article 161 के तहत राज्यपाल को क्षमादान से जुड़े मामलों में मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना अनिवार्य है।
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- न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल के पास व्यक्तिगत विवेकाधीन शक्ति नहीं है।
- राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह का पालन करना अनिवार्य है।
- क्षमादान में दया, दंड में राहत, सजा में कमी और परिवर्तन शामिल हैं।
- मंत्रिपरिषद की सलाह से अलग निर्णय लेना संविधान के विरुद्ध है।
- यह निर्णय संसदीय लोकतंत्र और जिम्मेदार सरकार की अवधारणा को मजबूत करता है।
- न्यायालय ने पहले के कुछ निर्णयों को per incuriam घोषित किया।
- राज्यपाल एक नाममात्र का प्रमुख है, स्वतंत्र कार्यपालिका नहीं।
- वास्तविक कार्यपालिका शक्ति निर्वाचित सरकार के पास होती है।
- अनुच्छेद 161 राज्य के अधिकार क्षेत्र के अपराधों पर लागू होता है।
- यह शक्ति मानवीय दृष्टिकोण से न्याय में संतुलन बनाए रखने के लिए है।
- इन शक्तियों पर न्यायिक समीक्षा संभव है, जैसे मनमानी या दुर्भावना के मामलों में।
- यह प्रावधान न्याय और दया के बीच संतुलन स्थापित करता है।





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