चीन की सेना ने 1 अप्रैल, 2025 को ताइवान के चारों ओर बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास शुरू किया, जिसमें सेना, नौसेना, वायु सेना और रॉकेट बलों को शामिल किया गया। यह अभ्यास ताइवान के आस-पास नाकाबंदी की रणनीति पर केंद्रित है, जो चीन के ताइवान पर नियंत्रण को स्थापित करने के उद्देश्य से है। बीजिंग ने इन कार्रवाइयों को चीन की संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक बताया है। ताइवान की सेना ने इस गतिविधि पर कड़ी नजर रखी है, जबकि क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है।
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- चीन ने ताइवान के चारों ओर बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास शुरू किया, जिसमें सेना, नौसेना और वायु सेना शामिल हैं।
- यह अभ्यास ताइवान की नाकाबंदी का अभ्यास करने के लिए किया गया है, जो सैन्य श्रेष्ठता को साबित करने का प्रयास है।
- चीनी सैन्य अधिकारी इन कार्रवाइयों को “वैध” मानते हैं, जो चीन की संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक हैं।
- बीजिंग ने ताइवान के स्वतंत्रता के दावे को नकारते हुए ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए बल प्रयोग की धमकी दी।
- ताइवान ने 24 घंटे के भीतर 19 चीनी युद्धपोतों का पता लगाया, जिससे सैन्य गतिविधि के प्रति चिंता बढ़ी।
- सैन्य अभ्यास में समुद्री-हवाई लड़ाई की तैयारियां, समुद्र और भूमि लक्ष्यों पर हमले और प्रमुख समुद्री रास्तों की नाकाबंदी शामिल हैं।
- ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने पहले चीन को “विदेशी शत्रु बल” बताया और रक्षा उपायों को मजबूत किया।
- अमेरिका द्वारा ताइवान को सैन्य समर्थन जारी रखा गया है, जिसमें 2026 तक नए F-16V लड़ाकू विमानों की तैनाती शामिल है।
- ताइवान और चीन के बीच विवाद 1949 से जारी है, जब चीनी नागरिक युद्ध के बाद दोनों देशों में विभाजन हुआ।
- क्षेत्र में तनाव बढ़ने से चीन और अमेरिका के बीच युद्ध की संभावना को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।





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