चौथ और सरदेशमुखी मराठा शासन की कर प्रणाली थी, जिसे Chhatrapati Shivaji ने स्थायी आय और प्रशासन को मजबूत करने के लिए लागू किया।
BulletsIn
- चौथ कुल राजस्व का एक चौथाई हिस्सा था।
- सरदेशमुखी कुल राजस्व का दसवां हिस्सा अतिरिक्त कर था।
- यह कर मुख्य रूप से मुगल क्षेत्रों में लगाया जाता था।
- इसने मुल्कगिरी जैसी लूट प्रणाली को समाप्त किया।
- इससे नियमित आय प्राप्त हुई।
- सेना और प्रशासन को मजबूत करने में मदद मिली।
- शिवाजी ने सरदेशमुखी को अपना परंपरागत अधिकार बताया।
- इससे दोहरी राजस्व प्रणाली बनी।
- यह दीर्घकालिक शासन के लिए उपयोगी रहा।
- इसका आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव व्यापक था।





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