नवंबर 2025 की शुरुआत में चंद्रयान-3 का प्रपल्शन मॉड्यूल अपनी पृथ्वी-केंद्रित कक्षा में घूमते हुए अचानक चांद की गुरुत्व सीमा में लौट आया। पृथ्वी और चांद की संयुक्त गुरुत्व खींच ने इसकी राह बदली, जिससे ISRO को गहरे अंतरिक्ष की गतिशीलता पर नया डेटा मिला।
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- 4 नवंबर 2025 को मॉड्यूल चांद के Sphere of Influence में लौटा।
- 2023 से मॉड्यूल पृथ्वी की 1 लाख–3 लाख किमी कक्षा में घूम रहा था।
- पृथ्वी-चांद की संयुक्त गुरुत्व शक्तियों ने वापसी को संभव किया।
- दो फ्लाइबाय: 6 नवंबर (3740 किमी) और 12 नवंबर (4537 किमी)।
- किसी भी अन्य चंद्र ऑर्बिटर से नज़दीकी नहीं हुई।
- कक्षा बढ़कर 4.09 लाख किमी × 7.27 लाख किमी हो गई।
- झुकाव 34° से घटकर 22° हुआ, मार्ग में बड़ा बदलाव।
- ISTRAC और IDSN ने गतिविधि को सटीक रूप से ट्रैक किया।
- घटना से टॉर्क प्रभाव, दोहरी गुरुत्व खींच और फ्लाइट डायनेमिक्स पर नया ज्ञान मिला।
- 14 नवंबर 2025 को मॉड्यूल के फिर चंद्र सीमा से बाहर जाने की उम्मीद।





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