भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ावा देते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चेन्नई स्थित एयरोस्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉस्मोस को अग्निबाण लॉन्च वाहन विकसित करने में वित्तीय सहायता प्रदान की है।
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- अग्निकुल अग्निबाण नामक दो-चरणीय रॉकेट विकसित कर रहा है जो 700 किमी की ऊंचाई तक 300 किग्रा तक का उपग्रह ले जा सकता है।
- प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) द्वारा समर्थित इस परियोजना का उद्देश्य सस्ती और सुलभ उपग्रह प्रक्षेपण सुनिश्चित करना है।
- यह वित्तीय सहायता मॉड्यूलर रॉकेट के विकास को प्रोत्साहित करती है जो विभिन्न मिशनों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
- अग्निबाण उपग्रह प्रक्षेपण के लिए लीड टाइम को दो सप्ताह तक कम करता है।
- रॉकेट भारत के पहले सिंगल-पीस 3D प्रिंटेड इंजन और मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म से लैस है।
- मोबाइल लॉन्च सिस्टम से किसी भी वैश्विक स्थान से प्रक्षेपण संभव है।
- IIT-मद्रास से इनक्यूबेटेड अग्निकुल को 45 पूर्व ISRO वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन प्राप्त है।
- पहले की उपलब्धि में अग्निबाण SOrTeD का सफल प्रक्षेपण शामिल है, जो दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड इंजन-चालित रॉकेट है।
- सभी प्रमुख उपप्रणालियां स्टार्टअप द्वारा इन-हाउस विकसित की गई हैं।
- परियोजना का उद्देश्य छोटे उपग्रह प्रक्षेपण की बढ़ती मांग को पूरा करके अंतरिक्ष तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाना है।





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