कर्नाटक युद्ध 1746 से 1763 के बीच दक्षिण भारत में ब्रिटिश और फ्रांसीसी कंपनियों के बीच लड़े गए संघर्ष थे। ये युद्ध यूरोपीय संघर्षों से जुड़े थे और इनके परिणामस्वरूप भारत में ब्रिटिश प्रभुत्व स्थापित हुआ तथा फ्रांसीसी प्रभाव कमजोर पड़ा।
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- कर्नाटक युद्ध दक्षिण भारत में 1746 से 1763 के बीच ब्रिटिश और फ्रांसीसी कंपनियों के बीच लड़े गए।
- ये युद्ध यूरोप के संघर्षों जैसे ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार युद्ध और सात वर्षों के युद्ध से जुड़े थे।
- प्रथम कर्नाटक युद्ध में फ्रांसीसियों ने मद्रास पर कब्जा कर लिया था।
- यह युद्ध ऐक्स ला शापेल की संधि से समाप्त हुआ और मद्रास ब्रिटिश को वापस मिला।
- द्वितीय कर्नाटक युद्ध में हैदराबाद और कर्नाटक के उत्तराधिकार विवादों में हस्तक्षेप हुआ।
- रॉबर्ट क्लाइव द्वारा आर्कोट पर कब्जा ब्रिटिश शक्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहा।
- तृतीय कर्नाटक युद्ध सात वर्षों के युद्ध का हिस्सा था और निर्णायक सिद्ध हुआ।
- वांडीवाश के युद्ध में फ्रांसीसी सेना की हार ने ब्रिटिश प्रभुत्व सुनिश्चित किया।
- 1763 की पेरिस संधि के बाद फ्रांसीसी प्रभाव कुछ क्षेत्रों तक सीमित रह गया।
- इन युद्धों के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में प्रमुख औपनिवेशिक शक्ति बन गई।





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