2025 का बजट भारत की वृद्धि को तेज़ी से बढ़ाने और 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में एक रोडमैप प्रस्तुत करता है। इसमें निवेश, आत्मनिर्भरता और डिजिटल परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो एक भविष्य-तैयार अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखता है।
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- औद्योगिक गतिविधि और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए कृषि, MSMEs, निवेश और निर्यात पर जोर।
- पीएम धन-धान्य कृषि योजना के तहत 17 मिलियन किसानों को लाभ, उत्पादकता और वित्तीय समावेशन में सुधार।
- फसलों का विविधीकरण, उच्च उत्पादन वाली बीजों और गोदामों पर ध्यान, जो खेती के आधुनिकीकरण को दर्शाता है।
- MSMEs के लिए बढ़ा हुआ निवेश, उच्च टर्नओवर सीमा, और कर्ज तक आसान पहुंच, जो इन व्यवसायों की भूमिका को मजबूत करेगा।
- ₹1 लाख करोड़ का शहरी चुनौती कोष और परिवहन तथा कनेक्टिविटी में निवेश, जिससे शहरों को विकास केंद्र बनाने का उद्देश्य।
- घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी उत्पादन और सौर पैनल निर्माण को बढ़ावा, आयात निर्भरता कम करने के लिए।
- ऊर्जा सुरक्षा और कम कार्बन उत्सर्जन के लिए सौर, पवन, और बैटरी भंडारण पर ध्यान।
- कर सुधारों में सरलीकरण, प्रत्यक्ष कर दरों में कमी और मध्यवर्गीय करदाताओं के लिए छूट, जो खपत और बचत को बढ़ावा देंगे।
- डिजिटलीकृत कर प्रशासन के माध्यम से व्यवसायों के लिए अनुपालन की सरलता पर जोर, जिससे व्यापार विस्तार को आकर्षित किया जाएगा।
- बढ़ते ऋण-से-GDP अनुपात के जोखिम का समाधान, उच्च-वृद्धि वाली अवसंरचना परियोजनाओं के लिए संपत्ति मोनेटाइजेशन योजना को फिर से सक्रिय किया जाएगा।
- बजट में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और समावेशी विकास के लिए दीर्घकालिक संरचनात्मक परिवर्तन को सुनिश्चित करते हुए आर्थिक विस्तार को संतुलित किया गया है।





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