भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान विकसित सिविल सेवा का उद्देश्य राजस्व संग्रह, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और औपनिवेशिक शासन को सुदृढ़ करना था, जिसने आधुनिक प्रशासन की आधारशिला रखी।
BulletsIn
-
लॉर्ड कॉर्नवालिस को भारत में सिविल सेवा का जनक माना जाता है, जिन्होंने भ्रष्टाचार रोकने हेतु संगठित और वेतनभोगी प्रशासनिक व्यवस्था बनाई।
-
ईस्ट इंडिया कंपनी की व्यावसायिक सेवाओं से विकसित होकर सिविल सेवा इम्पीरियल सिविल सर्विस के रूप में स्थापित हुई।
-
प्रशासनिक रूप से सेवाओं को उच्च पदों हेतु संविदाबद्ध तथा निम्न स्तर हेतु असंविदाबद्ध सेवाओं में विभाजित किया गया।
-
प्रारंभिक भर्ती संरक्षक प्रणाली पर आधारित थी, लेकिन चार्टर एक्ट 1853 ने प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली लागू की।
-
सिविल सेवा परीक्षाएं मुख्यतः लंदन में आयोजित होती थीं, जिससे भारतीय अभ्यर्थियों के लिए अनेक बाधाएं उत्पन्न हुईं।
-
1886 के आइचिसन आयोग ने सेवाओं को इम्पीरियल, प्रांतीय और अधीनस्थ वर्गों में पुनर्गठित करने की सिफारिश की।
-
1924 के ली आयोग ने सीमित भारतीयकरण का समर्थन किया और लोक सेवा आयोग की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
-
सत्येंद्रनाथ टैगोर 1863 में भारतीय सिविल सेवा में चयनित होने वाले पहले भारतीय बने।
-
सिविल सेवा का मुख्य कार्य राजस्व वसूली, प्रशासन संचालन और कानून व्यवस्था बनाए रखना था।
-
औपनिवेशिक उद्देश्य के बावजूद, यह प्रशासनिक ढांचा स्वतंत्र भारत की स्थायी नौकरशाही का आधार बना।





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.