भीमा कोरेगांव का युद्ध 1 जनवरी 1818 को महाराष्ट्र के कोरेगांव गांव के पास तीसरे आंग्ल मराठा युद्ध के दौरान लड़ा गया। यह घटना मराठा शक्ति के पतन और ब्रिटिश प्रभुत्व के उदय का महत्वपूर्ण चरण बनी, साथ ही बाद में सामाजिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व स्थापित हुआ।
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- यह युद्ध ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और पेशवा नेतृत्व वाले मराठा साम्राज्य के बीच कोरेगांव, महाराष्ट्र में हुआ।
- यह तीसरे आंग्ल मराठा युद्ध का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश नियंत्रण को मजबूत करना था।
- पेशवा बाजीराव द्वितीय ने पुणे पर पुनः अधिकार पाने का प्रयास किया, जिससे संघर्ष की स्थिति बनी।
- ब्रिटिश सेना का नेतृत्व कैप्टन फ्रांसिस स्टॉन्टन ने किया, जिसमें विभिन्न रेजिमेंट के सैनिक शामिल थे।
- महार समुदाय की भागीदारी ने इस युद्ध को सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया।
- इस युद्ध में ब्रिटिश विजय ने मराठा शक्ति को कमजोर किया और ब्रिटिश विस्तार को बढ़ावा मिला।
- यह संघर्ष औपनिवेशिक विस्तार और क्षेत्रीय स्वतंत्रता के बीच टकराव का प्रतीक माना जाता है।
- कोरेगांव में विजय स्तंभ स्थापित किया गया, जो सैनिकों की वीरता को दर्शाता है।
- समय के साथ यह घटना दलित गौरव और प्रतिरोध का प्रतीक बन गई।
- इस युद्ध के बाद पेशवा शासन के पतन और ब्रिटिश प्रभुत्व के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ।





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