एक नई रिसर्च में पाया गया है कि अंटार्कटिका की गर्मियों की समुद्री बर्फ रिकॉर्ड स्तर पर पिघल रही है। सैटेलाइट, समुद्री रोबोट और कंप्यूटर मॉडल के जरिए किए गए अध्ययन से पता चला कि यह पिघलना महासागरों को गर्म कर रहा है, पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है और जलवायु अस्थिरता बढ़ा रहा है।
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- अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ अब तक के सबसे कम स्तर पर
- पिघलने से महासागर में गर्मी बढ़ रही, जलवायु चक्र बिगड़ रहे
- पहले सर्दियों में महासागर ठंडे होते थे, अब गर्मी बनी रहती है
- अध्ययन में वर्षों के डेटा, सैटेलाइट और रोबोट का उपयोग
- बर्फ की कमी से समुद्र ज्यादा धूप सोखता है, गर्मी बढ़ती है
- समुद्री जीवन प्रभावित—सूक्ष्म पौधों से लेकर मछली, पक्षी, सील तक
- तटों पर तेज लहरें, हिमखंड टूटने की घटनाएं बढ़ीं
- सप्लाई मिशन को rough समुद्र और नए खतरों का सामना
- गर्म महासागर अब 3+ साल में ही सामान्य हो पा रहे
- वैज्ञानिकों ने तुरंत जलवायु कार्रवाई की अपील की





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