अहोम विद्रोह अठारहवीं शताब्दी में असम में उत्पन्न उन आंदोलनों को दर्शाता है, जो आंतरिक कुशासन और बाद में बर्मी आक्रमणों के कारण हुए। इन घटनाओं ने अहोम साम्राज्य को कमजोर किया और अंततः ब्रिटिश हस्तक्षेप का मार्ग प्रशस्त किया।
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- अहोम वंश की स्थापना 1228 में सुकाफा ने की, लगभग छह शताब्दियों तक शासन।
- अठारहवीं शताब्दी के अंत में दरबारी संघर्ष और प्रशासनिक अव्यवस्था बढ़ी।
- मोआमोरिया विद्रोह 1769 से प्रारंभ, प्रमुख और व्यापक आंदोलन।
- कठोर पैक व्यवस्था और अधिक कर से जनता में असंतोष।
- आंतरिक संघर्ष से सैन्य और केंद्रीय शक्ति कमजोर हुई।
- उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में बर्मी आक्रमणों से स्थिति और बिगड़ी।
- लंबे संघर्ष से आर्थिक संकट और जनसंख्या विस्थापन।
- 1826 की यांडाबो संधि के बाद ब्रिटिश हस्तक्षेप।
- अहोम शासन का अंत और असम में ब्रिटिश प्रशासन की शुरुआत।
- विद्रोह असम के सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण अध्याय।





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