चीन और भारत में पाँच दशक बाद पहली बार कोयला आधारित बिजली उत्पादन में एक साथ गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक उत्सर्जन में कमी की संभावना बढ़ी है।
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ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र के विश्लेषण के अनुसार 1973 के बाद पहली बार दोनों देशों में कोयला आधारित बिजली उत्पादन घटा।
अध्ययन के अनुसार यह परिवर्तन ऐतिहासिक है और इसका प्रमुख कारण स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं का अभूतपूर्व विस्तार रहा।
पिछले वर्ष चीन में कोयला आधारित बिजली उत्पादन में लगभग 1.6 प्रतिशत तथा भारत में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
चीन ने सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि करते हुए सैकड़ों गीगावाट नई स्वच्छ ऊर्जा क्षमता जोड़ी।
भारत ने सौर, पवन और जलविद्युत क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि कर स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत किया।
स्वच्छ ऊर्जा विस्तार ने भारत में जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादन में कमी लाने में पहली बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत में जीवाश्म ईंधन खपत में कमी का एक बड़ा हिस्सा सामान्य से कम तापमान और मांग वृद्धि में मंदी के कारण रहा।
यदि कोयले का उपयोग स्थायी रूप से घटता है तो वैश्विक कोयला खपत और कार्बन उत्सर्जन में भी स्थायी गिरावट संभव है।





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