नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 में स्वीकृत दिल्ली घोषणा ने समावेशी विकास, समानता और वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं पर आधारित शासन की नई दिशा प्रस्तुत की।
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- नई दिल्ली के भारत मंडपम में विश्व नेताओं की उपस्थिति में दिल्ली घोषणा को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया, जिससे वैश्विक प्रौद्योगिकी शासन की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक परिवर्तन परिलक्षित हुआ।
- यह घोषणा पूर्व में Bletchley Park तथा सियोल में आयोजित सम्मेलनों की केवल अस्तित्वगत जोखिम आधारित चर्चाओं से आगे बढ़कर विकास और समानता पर आधारित दृष्टिकोण को महत्व देती है।
- घोषणा सात सूत्रों पर आधारित प्रौद्योगिकी-विधिक ढांचा प्रस्तुत करती है, जिसमें विश्वास, सुरक्षा, मानव गरिमा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, निष्पक्षता तथा सतत विकास को मूल आधार बनाया गया है।
- कठोर नियंत्रण और जटिल नियम व्यवस्था के स्थान पर यह घोषणा परिस्थिति के अनुरूप परिवर्तनीय तथा लचीले शासन तंत्र को प्रोत्साहित करती है, जिससे तीव्र गति से विकसित प्रौद्योगिकियों का संतुलित उपयोग संभव हो सके।
- घोषणा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से संसाधनों के असंतुलित दोहन का विरोध करती है तथा आँकड़ा संप्रभुता पर बल देते हुए Aadhaar और Unified Payments Interface जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं के समन्वित उपयोग को आवश्यक बताती है।
- “जन, पृथ्वी और प्रगति” के त्रिस्तरीय ढांचे के अंतर्गत बहुभाषीय जनोपयोगी प्रणालियों के विकास, ऊर्जा दक्ष संगणना को बढ़ावा तथा संसाधनों की न्यायसंगत उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है।
- समावेशी विकास, समान अवसर और उत्तरदायी नवाचार को केंद्र में स्थापित कर यह घोषणा भारत तथा अन्य विकासशील राष्ट्रों को उभरती वैश्विक व्यवस्था में नियम-निर्धारक की सशक्त भूमिका प्रदान करती है





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