केरल ने अनुसंधान, नवाचार और ग्रेफीन आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए भारत की पहली व्यापक ग्रेफीन नीति को स्वीकृति दी है।
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- केरल देश का पहला राज्य बना जिसने ग्रेफीन पर व्यापक नीति अपनाई, जिसका उद्देश्य अनुसंधान, विकास और औद्योगिक उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
- ग्रेफीन कार्बन परमाणुओं की एकल परत है, जो षट्कोणीय संरचना में व्यवस्थित होती है और उच्च विद्युत चालकता तथा अत्यधिक मजबूती के लिए जानी जाती है।
- इस पहल के अंतर्गत “ग्रेफीन पार्क” (Grefine Park) की स्थापना को मंजूरी दी गई, जिससे नवाचार और विनिर्माण को गति मिलेगी।
- पलक्कड़ में एक समर्पित ग्रेफीन औद्योगिक पार्क तथा ₹200 करोड़ के निवेश से एक डिजिटल नवाचार केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- राज्य सरकार सरकारी औद्योगिक पार्कों में स्थापित इकाइयों को पट्टे पर 50% सब्सिडी प्रदान करेगी।
- नीति का उद्देश्य शैक्षणिक अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग के बीच की दूरी को कम करना है, जिसके लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और मैनचेस्टर विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के साथ सहयोग किया जाएगा।
- वर्ष 2004 में मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पहली बार ग्रेफीन को पृथक किया था।
- ग्रेफीन के उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा भंडारण, सेमीकंडक्टर, मिश्रित सामग्री और जैव-चिकित्सकीय उपकरणों में होते हैं।
- यह नीति प्रयोगशाला से व्यावसायिक उत्पादन तक एक समेकित मूल्य श्रृंखला विकसित करने पर बल देती है।
- यह पहल केरल की उच्च-प्रौद्योगिकी आधारित विकास और सिल्वर लाइन (के-रेल) जैसी अवसंरचनात्मक परियोजनाओं के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है।





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