देवबंद आंदोलन 1866 में एक महत्वपूर्ण इस्लामी सुधार पहल के रूप में उभरा, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के दौरान सुन्नी इस्लाम की पारंपरिक शिक्षाओं को संरक्षित करना, धार्मिक शिक्षा को सुदृढ़ करना और मुस्लिम पहचान की रक्षा करना था।
BulletsIn
-
यह आंदोलन 1857 के विद्रोह के बाद उभरा, जब मुस्लिम राजनीतिक शक्ति कमजोर हुई और ब्रिटिश शासन मजबूत हुआ।
-
1866 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में दारुल उलूम देवबंद की स्थापना एक स्वतंत्र इस्लामी शिक्षण संस्था के रूप में की गई।
-
पाठ्यक्रम में कुरान, हदीस, फिक्ह (हनफ़ी न्यायशास्त्र), धर्मशास्त्र और पारंपरिक इस्लामी विज्ञानों पर विशेष जोर दिया गया।
-
आंदोलन ने शरिया के कठोर पालन, बिदअत (धार्मिक नवाचार) के विरोध और तौहीद (एकेश्वरवाद) पर बल दिया।
-
इसकी स्थापना मौलाना मुहम्मद क़ासिम नानौतवी और मौलाना राशिद अहमद गंगोही ने की, जिनका उद्देश्य समाज का मार्गदर्शन करने वाले उलेमा तैयार करना था।
-
देवबंदी विद्वानों ने औपनिवेशिक शासन का विरोध किया और कई नेताओं ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन किया।
-
इस आंदोलन ने दक्षिण एशिया में मदरसों का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया और भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित अन्य देशों में धार्मिक विचारधारा को प्रभावित किया।





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.