अहमदिया आंदोलन की स्थापना 1889 में मिर्जा गुलाम अहमद ने की, जिसने इस्लामी पुनर्जागरण, तर्कवाद और अंतरधार्मिक सद्भाव पर बल दिया।
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अहमदिया आंदोलन की स्थापना 1889 में क़ादियाँ, पंजाब में मिर्जा गुलाम अहमद द्वारा ब्रिटिश शासनकाल की सामाजिक-धार्मिक परिस्थितियों में की गई।
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मिर्जा गुलाम अहमद ने स्वयं को प्रतिज्ञात मसीह और महदी घोषित किया, जिनका उद्देश्य इस्लाम का पुनरुद्धार और शांति का प्रसार था।
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आंदोलन ने आध्यात्मिक सुधार, नैतिक उन्नति, इस्लामी ग्रंथों की तार्किक व्याख्या और अंतरधार्मिक संवाद पर जोर दिया।
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अहमदिया समुदाय मिर्जा गुलाम अहमद को गैर-शरीअत लाने वाले नबी के रूप में मानता है, जिसका मुख्यधारा सुन्नी मुस्लिम विरोध करते हैं।
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आंदोलन ने हिंसक जिहाद का विरोध किया और शांतिपूर्ण प्रचार, मानवाधिकार तथा मस्जिद और राज्य के पृथक्करण का समर्थन किया।
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1914 में यह आंदोलन सिद्धांतगत मतभेदों के कारण अहमदिया मुस्लिम कम्युनिटी और लाहौर अहमदिया आंदोलन में विभाजित हो गया।
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1947 के बाद पाकिस्तान में संवैधानिक विवाद उत्पन्न हुआ और 1974 में संशोधन द्वारा अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित किया गया।
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मिर्जा गुलाम अहमद के बाद नेतृत्व खलीफाओं को सौंपा गया, जिनमें हकीम नूर-उद-दीन और मिर्जा बशीर-उद-दीन महमूद अहमद प्रमुख थे।





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