न्यायमूर्ति एम.एम. पंची की अध्यक्षता में गठित पंची आयोग ने भारत की बदलती राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में केंद्र–राज्य संबंधों की समीक्षा की।
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पंची आयोग का गठन 2007 में किया गया था, जिसने सरकारिया आयोग के बाद केंद्र–राज्य संबंधों की पुनः समीक्षा की।
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आयोग ने विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों सहित राज्यपाल की भूमिका और आपात प्रावधानों का अध्ययन किया।
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वित्त आयोग की शर्तों के निर्धारण में राज्यों की भागीदारी बढ़ाने की सिफारिश की गई।
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आयोग ने सेस और अधिभार की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए इनके पुनरीक्षण की सलाह दी।
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राज्यपाल के पद के लिए राज्य से बाहर के, निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक व्यक्ति की नियुक्ति का सुझाव दिया गया।
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अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को रोकने हेतु पूरे राज्य के बजाय सीमित क्षेत्र में आपात लागू करने की सिफारिश की गई।
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समवर्ती सूची से संबंधित कानूनों पर अंतर-राज्य परिषद के माध्यम से राज्यों से परामर्श का सुझाव दिया गया।
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आयोग ने सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए राज्यों को संधि निर्माण और आंतरिक सुरक्षा मामलों में अधिक भूमिका देने पर बल दिया।





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