जस्टिस पार्टी औपनिवेशिक दक्षिण भारत में गैर-ब्राह्मण समुदायों के अधिकारों के लिए उभरी और सामाजिक न्याय नीतियों की आधारशिला रखी।
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जस्टिस पार्टी जिसे दक्षिण भारतीय लिबरल फेडरेशन कहा जाता था वर्ष 1916 में मद्रास प्रेसीडेंसी में गैर ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के लिए गठित हुई।
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डॉ टी एम नायर पी त्यागराजा चेट्टी और सी नतेसा मुदलियार ने प्रशासन और शिक्षा में ब्राह्मण वर्चस्व को चुनौती देने हेतु पार्टी की स्थापना की।
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यह आंदोलन दक्षिण भारत की गहरी जातिगत असमानताओं की पृष्ठभूमि में उभरा जहां अल्पसंख्यक ब्राह्मण उच्च पदों पर प्रभावी थे।
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नवंबर 1916 में चेन्नई के वेपरी में गैर ब्राह्मण नेताओं की बैठक से SILF की स्थापना हुई जो आगे चलकर जस्टिस पार्टी कहलायी।
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दिसंबर 1916 में जारी गैर ब्राह्मण घोषणापत्र में ब्रिटिश शासन के प्रति निष्ठा के साथ राजनीतिक समानता की मांग की गई।
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1920 में जस्टिस पार्टी ने मद्रास प्रेसीडेंसी चुनाव जीतकर कांग्रेस के विकल्प के रूप में सरकार बनाई।
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पार्टी ने आरक्षण नीति और मद्रास प्राथमिक शिक्षा अधिनियम 1920 जैसे सुधारों से सामाजिक न्याय को बढ़ावा दिया।
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1930 के दशक में आंतरिक मतभेदों और कांग्रेस के उदय से पार्टी कमजोर हुई और 1944 में द्रविड़ कड़गम में परिवर्तित हो गई।





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