1965 में एम.एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में शुरू हुई हरित क्रांति ने उच्च उपज बीज, सिंचाई, उर्वरक और मशीनों से खाद्यान्न उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया। इससे खाद्य कमी खत्म हुई, ग्रामीण आय बढ़ी, और खेती का स्वरूप बदला, लेकिन पर्यावरण और क्षेत्रीय असमानताएँ भी बढ़ीं।
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• 1965 में शुरुआत; लक्ष्य था खाद्यान्न उत्पादन तेज़ बढ़ाना
• गेहूं-चावल HYV बीजों से उपज में बड़ी बढ़ोतरी
• पंजाब, हरियाणा, यूपी को सबसे अधिक लाभ; क्षेत्रीय असमानता बढ़ी
• भारत खाद्यान्न कमी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा
• पूंजी-गहन लागत के कारण बड़े किसानों को अधिक लाभ
• ट्रैक्टर, पंप, खाद-कीटनाशक उद्योगों में तेज़ विस्तार
• भूजल दोहन बढ़ा; मिट्टी की उर्वरता घटने लगी
• कीटनाशक अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम
• मशीनीकरण से कई क्षेत्रों में ग्रामीण रोजगार कम
• दूसरी हरित क्रांति अब टिकाऊ और जैविक कृषि पर केंद्रित





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