4 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा में हुए टकराव में पुलिस फायरिंग के बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थाने को जला दिया। इसमें 22–23 पुलिसकर्मी मारे गए। इस हिंसक घटना ने महात्मा गांधी को असहयोग आंदोलन तुरंत वापस लेने के लिए मजबूर किया क्योंकि वे किसी भी प्रकार की हिंसा के खिलाफ थे।
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- घटना असहयोग आंदोलन के दौरान हुई, जो गांधी जी ने शुरू किया था।
- स्थानीय मुद्दों पर विरोध के बाद पुलिस ने नेताओं को गिरफ्तार किया।
- करीब 2,000–2,500 प्रदर्शनकारी दोबारा मार्च करते हुए पुलिस से भिड़े।
- पुलिस गोलीबारी में प्रदर्शनकारी मारे गए, भीड़ क्रोधित हुई।
- भीड़ ने चौरी-चौरा थाना जला दिया; 22–23 पुलिसकर्मी मारे गए।
- गांधी जी ने हिंसा की निंदा की और 12 फरवरी 1922 को आंदोलन रोक दिया।
- आंदोलन रोकने पर नेताओं में मतभेद; नेहरू, सी.आर.दास ने स्वराज पार्टी बनाई।
- ब्रिटिश सरकार ने मार्शल लॉ लगाया, सैकड़ों गिरफ्तार, बड़े मुकदमे चले।
- शुरुआती फैसले में 172 को फांसी; हाई कोर्ट ने अधिकांश सज़ाएँ घटाईं।
- घटना ने साबित किया कि अनुशासनहीन जन-आंदोलन हिंसा की ओर बढ़ सकता है।





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