भारत के चंद्रयान-2 मिशन ने पहली बार यह प्रमाण दिया है कि सौर तूफान (CME) के दौरान चांद के वातावरण की घनत्व बढ़ जाती है। यह घटना मई पिछले साल दर्ज की गई।
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- चंद्रयान-2 के CHACE-2 उपकरण ने चांद के एक्सोस्फियर में अणुओं की वृद्धि दर्ज की।
- यह घटना तब हुई जब सूर्य से प्लाज़्मा का शक्तिशाली विस्फोट (CME) निकला।
- सौर कणों ने चांद की सतह से अणु उखाड़े, जिससे वातावरण घना हुआ।
- चांद पर चुंबकीय क्षेत्र नहीं, इसलिए सौर तूफानों का सीधा असर पड़ता है।
- CME के दौरान एक्सोस्फियर के दबाव में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की गई।
- यह अध्ययन Geophysical Research Letters में प्रकाशित हुआ, ISRO के एम.बी. धन्या प्रमुख लेखक।
- यह सौर गतिविधियों से चांद के वातावरण में बदलाव का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण है।
- यह जानकारी 2040 तक मानव मिशन की तैयारी में मदद करेगी।
- भविष्य के चांद बेस को ऐसे सौर तूफानों से बचाने में उपयोगी होगी।
- यह अध्ययन बुध, क्षुद्रग्रहों और बाहरी ग्रहों के वातावरण समझने में भी मदद करेगा।





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