एक नए रिपोर्ट में हिमालयी क्षेत्र के लिए बहु-जोखिम प्रारंभ चेतावनी एवं लचीलापन आधारित बस्तियों के ढाँचे का सुझाव दिया गया है, जिसमें जापान, नॉर्वे एवं स्विट्जरलैंड के मॉडल से सीखने को कहा गया है। बढ़ते जलवायु जोखिम, अकल्पित विकास और अधिक आपदाएँ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता जताती हैं
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हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा, ग्लेशियर पिघलना, भूस्खलन व फ्लैश बाढ़ खतरा बढ़ रहा है।
• अनियोजित बस्तियाँ और इंफ्रास्ट्रक्चर ढाँचे ढलानों और जल निकासी व्यवस्था को बिगाड़ रहे हैं।
• प्रस्ताव: चेतावनी प्रणाली को बस्तियों की योजना, लचीलापन और जलवायु अनुकूलन से जोड़ा जाए।
• जापान, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे के मॉडल से तकनीक, शासन और समुदाय का मिश्रण अपनाने का सुझाव।
• कम लागत वाले सेंसर लगाए जाएँ—वर्षा, मिट्टी नमी, झील स्तर—तत्काल अलर्ट भेजने हेतु।
• दीर्घकालीन योजना: जोखिम आधारित भूमि उपयोग नीति, नियोजित पुनर्वास, संस्थागत निगरानी।
• समन्वय एवं निगरानी के लिए हिमालय जोखिम परिषद् का गठन प्रस्तावित।
• उद्देश्य: 2030 तक हिमालय में रोके जा सकने वाली आपदाओं में मृत्यु को शून्य करना।
• समुदाय की भागीदारी, जवाबदेही व सतत विकास से जोखिम न्यूनीकरण को जोड़ने पर बल





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