ब्रिटिश भारत में न्यायिक प्रणाली 1726 से 1950 तक विकसित हुई। ईस्ट इंडिया कंपनी के तहत शुरू होकर सुप्रीम कोर्ट के निर्माण तक, इसमें कई सुधारों ने न्याय व्यवस्था को बदला।
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ब्रिटिश भारत में न्यायिक प्रणाली की शुरुआत 1726 में मद्रास, बॉम्बे, और कलकत्ता में हुई।
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वॉरेन हेस्टिंग्स ने दीवानी (सिविल) और फौजदारी (आपराधिक) अदालतों की स्थापना की।
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कॉर्नवालिस के सुधार (1787-1793) ने राजस्व और न्यायिक कार्यों को अलग किया।
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चार्टर एक्ट 1833 ने भारतीय कानून आयोग का गठन कर कानून संहिताबद्ध किया।
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भारतीय दंड संहिता (1860) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (1861) बनीं।
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1861 के भारतीय हाई कोर्ट एक्ट ने सदर अदालतों और सुप्रीम कोर्ट को हाई कोर्ट से बदला।
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कलकत्ता हाई कोर्ट (1862) पहला था, उसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट (1866) बना।
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1937 में संघीय न्यायालय गठित हुआ जो संघीय मामलों को देखता था।
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ब्रिटिश भारत में न्यायिक प्रणाली 1950 में सुप्रीम कोर्ट के निर्माण के साथ समाप्त हुई।
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इस प्रणाली ने कानून में समानता लाई लेकिन यह महंगी, जटिल और धीमी रही।





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