खगोलविद पृथ्वी–चंद्रमा प्रणाली का उपयोग कर अत्यंत क्षीण गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। आइंस्टीन द्वारा भविष्यवाणी की गई ये तरंगें पृथ्वी पर लगभग अप्रमाण्य हैं, लेकिन यह चंद्रमा की दूरी को सूक्ष्म रूप से बदल सकती हैं।
BulletsIn
- गुरुत्वाकर्षण तरंगें: विशाल ब्रह्मांडीय घटनाओं से बनी लहरें
- ब्लैक होल टकराव, न्यूट्रॉन तारे भिड़ंत से उत्पन्न
- प्रकाश की गति से फैलतीं, दूरी बढ़ने पर कमजोर होतीं
- पृथ्वी पर लगभग अदृश्य; धरती–चाँद दूरी बदले परमाणु से भी कम
- मापने हेतु इंटरफेरोमीटर बनाए गए, जैसे LIGO
- LIGO की 4 किमी लंबी भुजाएँ लेज़र के सूक्ष्म बदलाव पकड़तीं
- आइंस्टीन ने 1916 में की भविष्यवाणी, दशकों तक बहस
- 2015 में पहली बार तरंगें दर्ज, ब्लैक होल टकराव से
- अब वैज्ञानिक चाँद को स्थिर डिटेक्टर मान कर प्रयोग कर रहे
- इससे ब्रह्मांड की अदृश्य गतियों पर नई खिड़की खुलेगी





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.