एक नए अध्ययन से पता चला है कि भारतीय मानसून का विकास 3.4 करोड़ साल पहले अंटार्कटिका में बर्फ बनने से जुड़ा है। नागालैंड की एक जीवाश्म पत्ती ने दिखाया कि कैसे ध्रुवीय बर्फ ने वर्षा पैटर्न बदलकर भारत में मानसून को आकार दिया।
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- अध्ययन प्रकाशित Palaeogeography, Palaeoclimatology, Palaeoecology में
- 3.4 करोड़ साल पहले अंटार्कटिका में बर्फ बनने से बारिश के पैटर्न बदले
- पूर्वोत्तर भारत में भारी वर्षा शुरू हुई
- नागालैंड की जीवाश्म पत्ती से मिला सबूत
- CLAMP विश्लेषण से पता चला तब का मौसम आज से ज्यादा नम था
- बर्फ बनने से पृथ्वी की वर्षा पट्टी (ITCZ) उष्णकटिबंधीय की ओर खिसकी
- इस बदलाव से भारत में बारिश तेज हुई, वैश्विक हवाएं बदलीं
- नतीजे अंटार्कटिका में बर्फ जमने के वैश्विक समय से मेल खाते
- 2024 में मानसून बिगड़ा, पश्चिम भारत में बाढ़ और पूर्वोत्तर सूखा
- वैज्ञानिकों की चेतावनी: मानसून पर निर्भर करोड़ों लोग सूखा-बाढ़ के खतरे में





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