18वीं शताब्दी की शुरुआत में बंगाल प्रांत एक शक्तिशाली क्षेत्रीय राज्य के रूप में उभरा। मुरशिद कुली ख़ाँ को 1700 में दिवान और 1717 में गवर्नर बनाया गया। उन्होंने राजधानी को ढाका से मुर्शिदाबाद स्थानांतरित किया और प्रशासनिक सुधार किए। उनके उत्तराधिकारी शुजा-उद-दीन, अलीवर्दी ख़ाँ और सिराज-उद-दौला ने स्वायत्त शासन किया, लेकिन कमजोर सैन्य शक्ति और अंग्रेज़ी हस्तक्षेप ने पतन लाया।
BulletsIn
- औरंगज़ेब ने 1700 में मुरशिद कुली ख़ाँ को दिवान नियुक्त किया
- 1717 में फर्रुख़सियर ने गवर्नर बनाया
- दिवान और नाज़िम दोनों पद एक साथ धारण किए
- राजधानी ढाका से मुर्शिदाबाद स्थानांतरित की
- माल जस्मानी व्यवस्था लागू, ज़मींदारी व राजस्व प्रणाली बदली
- विद्रोहों को दबाया, बंगाल-बिहार-उड़ीसा तक सत्ता फैलाई
- अलीवर्दी ख़ाँ ने फ़रमान से वैधता पाई, मराठा आक्रमण झेले
- सिराज-उद-दौला ने अंग्रेज़ों के व्यापारिक अधिकार सीमित किए, प्लासी युद्ध 1757 हुआ
- अंग्रेज़ों ने मीर जाफर से गठजोड़ कर “द्वैध शासन” लागू किया
- नवाबों की कमजोर सेनाएँ और गलत नीति बंगाल पतन का कारण बनीं





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