तकनीकी विश्वविद्यालय म्यूनिख के शोधकर्ताओं ने पाया कि हर साल करीब 32 करोड़ पेड़ दुनिया भर में बिजली गिरने से मरते हैं। यह आंकड़ा आग से नष्ट पेड़ों को छोड़कर है, जिससे असल संख्या और भी अधिक हो सकती है। नया वैश्विक मॉडल अब बिजली से पेड़ मरने की गणना कर रहा है और जलवायु पर इसके प्रभाव का पूर्वानुमान दे रहा है।
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- हर साल 32 करोड़ पेड़ सीधे बिजली गिरने से नष्ट
- नुकसान दिखता नहीं, पहले सही आकलन मुश्किल था
- शोधकर्ताओं ने बिजली व वन डेटा से नया मॉडल बनाया
- सड़े पेड़ों से हर साल 0.77–1.09 अरब टन CO₂ उत्सर्जन
- ये वैश्विक वन जैवभार हानि का 2.9% तक हिस्सा
- ट्रॉपिकल वनों में सबसे अधिक बिजली से पेड़ मरते
- भविष्य में समशीतोष्ण वनों में वृद्धि की आशंका
- मरे पेड़ों से उत्सर्जन जंगलों की आग जितना गंभीर
- जलवायु मॉडल बिजली बढ़ने की चेतावनी दे रहे
- शोध में कहा गया—बिजली को भी जलवायु मॉडल में शामिल करें





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