मंदिर प्रवेश आंदोलन 20वीं सदी की शुरुआत में भारत में जातीय भेदभाव के खिलाफ एक बड़ा सामाजिक आंदोलन था। अंबेडकर, पेरियार और केलप्पन जैसे नेताओं ने मंदिरों में दलितों को प्रवेश दिलाने के लिए सत्याग्रह का सहारा लिया। आंदोलन से कई राज्यों में मंदिर सुधार हुए।
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- उद्देश्य: मंदिरों में जाति आधारित प्रतिबंध और अस्पृश्यता को खत्म करना।
- केरल से शुरुआत; नारायण गुरु, अंबेडकर, पेरियार प्रमुख प्रेरणा स्रोत।
- वैकम सत्याग्रह (1924) पहला बड़ा विरोध आंदोलन, मंदिर मार्गों की माँग।
- सवर्णों व राष्ट्रीय नेताओं का समर्थन मिला; गांधी ने महारानी से भेंट की।
- गुरुवायूर सत्याग्रह (1931–32) में भूख हड़ताल, लाठीचार्ज, युवा भागीदारी।
- केलप्पन के उपवास और छात्रों की भागीदारी से आंदोलन को बल मिला।
- विरोध के बावजूद आंदोलन से सामाजिक जागरूकता और सुधार को गति मिली।
- 1936 में त्रावणकोर में सभी जातियों के लिए मंदिर खोले गए; मद्रास ने भी अनुसरण किया।
- आंदोलन में स्वतंत्रता संग्राम के हथियार: जुलूस, जथा, सत्याग्रह का प्रयोग।
- संविधान में अस्पृश्यता पर रोक लगी, पर जातीय अन्याय अब भी एक चुनौती है।





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