औपनिवेशिक युग में दक्षिण भारत में कई समाज-सुधार आंदोलनों की शुरुआत हुई। ये आंदोलन ब्रह्म समाज और आर्य समाज जैसे उत्तरी भारत के आंदोलनों से प्रेरित थे। इनका उद्देश्य जातिवाद, महिला अधिकारों और शिक्षा में सुधार करना था।
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- जातिवाद विरोध, महिला अधिकार और शिक्षा पर केंद्रित आंदोलन
- ब्रह्म समाज, आर्य समाज से प्रेरणा मिली
- वेद समाज 1864 में मद्रास में स्थापित; विधवा विवाह, बालिका शिक्षा का समर्थन
- श्रीधरालु नायडू ने सुधारवादी साहित्य तमिल और तेलुगु में अनुवादित किया
- कंदुकुरी वीरेशलिंगम ने आंध्र में महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया
- नारायण गुरु ने SNDP आंदोलन से केरल के एझावा समुदाय को जागरूक किया
- 1905 में मैसूर में वोक्कालिगारा संघ ने एंटी-ब्राह्मिन आंदोलन चलाया
- 1925 में पेरियार ने आत्मसम्मान आंदोलन शुरू किया, ब्राह्मण प्रभुत्व का विरोध
- देवदासी प्रथा और मंदिर नियंत्रण में सुधार की मांग उठी
- आंदोलन ने तर्कवाद, समानता और द्रविड़ पहचान को बल दिया





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