भारत में उपनिवेशवादी व्यापार की दौड़ में फ्रांसीसी और डेनिश कंपनियां देर से आईं, लेकिन फिर भी उन्होंने महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी 1664 में स्थापित हुई और पांडिचेरी, चंदननगर आदि में व्यापारिक केंद्र बनाए। डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1616 में भारत में कदम रखा, लेकिन व्यापार से अधिक मिशनरी कार्यों में प्रसिद्ध रही।
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- फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 में हुई, जिसे हिंद महासागर में व्यापार का एकाधिकार मिला
- सुरत (1667), मछलीपट्टनम (1669), चंदननगर (1673) और बाद में पांडिचेरी में केंद्र बनाए
- डचों ने 1693 में पांडिचेरी पर कब्जा किया, 1697 की रिसविक संधि से लौटा
- स्पेनिश उत्तराधिकार युद्ध और आंतरिक वित्तीय समस्याओं से कंपनी कमजोर पड़ी
- 1700 के दशक में व्यापारिक केंद्र बंद करने पड़े, 1763 में पेरिस संधि से क्षेत्र वापस मिले
- फ्रांसीसी क्रांति और प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनी 1794 में समाप्त हो गई
- डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी 1616 में शुरू हुई, तंजावुर के पास त्रांक्वेबार (1620) में केंद्र बनाया
- प्रमुख केंद्र सेरमपुर था, व्यापारिक सफलता सीमित रही
- नेपोलियन युद्धों के दौरान ब्रिटिश हमलों से डेनिश व्यापार नष्ट हुआ
- डेनमार्क ने 1845 में भारत के अपने सभी केंद्र ब्रिटेन को सौंप दिए





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