भारत में 1931 के बाद पहली बार जनगणना में जाति की पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। यह कदम आरक्षण नीतियों की खामियों को दूर करने के लिए उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने SC, ST, और OBC के भीतर उप-वर्गीकरण की इजाजत दी है। लेकिन इस प्रक्रिया की सफलता के लिए सर्वसम्मति और स्पष्ट दिशा जरूरी है।
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- 94 साल बाद जनगणना में जाति की एंट्री
- SC/ST/OBC से आगे, असली जाति दर्ज होंगी
- मकसद: आरक्षण और विकास योजनाओं को बेहतर बनाना
- सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में उप-वर्गीकरण की इजाजत दी
- जस्टिस रोहिणी आयोग ने OBC उप-समूहों का अध्ययन किया
- सही आरक्षण वितरण के लिए सटीक डेटा जरूरी
- 2011 SECC में मिले थे 46 लाख जाति नाम
- अब तक कोई राष्ट्रीय जाति सूची नहीं
- जाति वर्गीकरण को लेकर कोर्ट में लगातार केस
- बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना में सर्वे पर विवाद
- केंद्र से सर्वसम्मति बनाकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग





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