सरकार कुछ चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक घटकों के जॉइंट वेंचर्स में चीनी कंपनियों को 26% तक हिस्सेदारी देने पर विचार कर रही है। हाल ही में हुई बैठक में यह प्रस्ताव भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं के साथ चर्चा में आया। सामान्य निवेश सीमाएं पहले की तरह सख्त बनी रहेंगी। इस कदम का मकसद तकनीकी हस्तांतरण और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है, खासकर नई ₹22,919 करोड़ की ECMS योजना के तहत।
BulletsIn
- चुनिंदा क्षेत्रों में चीनी निवेश सीमा 26% तक हो सकती है
- अन्य क्षेत्रों में निवेश सीमा 10% पर बनी रहेगी
- निवेश को ऑटोमेटिक मंज़ूरी नहीं, हर मामला अलग से देखा जाएगा
- सरकार चाहती है कि साझेदारियाँ तकनीक हस्तांतरण भी करें
- Lianchuang Electronics ने ECMS में दिलचस्पी दिखाने वाली पहली चीनी कंपनी
- Amber व Optiemus जैसी भारतीय कंपनियों से JV की बातचीत जारी
- Dixon, Tata, Kaynes जैसी भारतीय कंपनियाँ भी योजना में शामिल होने को तैयार
- जापान, ताइवान, ऑस्ट्रिया की कंपनियाँ भी भारत में निवेश की इच्छुक
- ECMS के लिए Six Sigma मानक व लोकल डिज़ाइन टीम अनिवार्य
- उद्योग ने गुणवत्ता पर ज़ोर का स्वागत किया, छोटे खिलाड़ियों को दिक्कत संभव





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