भारत में कृषि का तीव्र विस्तार जलवायु परिवर्तन संकट को और गंभीर बना रहा है। रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग, आक्रामक धान की खेती और मृदा क्षरण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को तेज कर रहे हैं। सरकार ने कुछ उपाय शुरू किए हैं, लेकिन व्यापक और टिकाऊ सुधार की आवश्यकता है।
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- कृषि अब भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत
- 2016 से 2019 के बीच कृषि उत्सर्जन में 4.5% वृद्धि
- कृषि विस्तार के लिए वनों की कटाई से कार्बन उत्सर्जन बढ़ा
- धान की खेती से हर साल 60 मिलियन टन मीथेन उत्सर्जन
- रासायनिक उर्वरक वायु, जल प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाते हैं
- नाइट्रेट के रिसाव से भूजल प्रदूषण बढ़ रहा है
- पंजाब और हरियाणा में मृदा गुणवत्ता गिर रही और भूजल स्तर घट रहा
- सरकार ने SRI और DSR जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC) योजना से उर्वरक उपयोग को संतुलित किया जा रहा
- जैविक खेती, मिश्रित फसलें और हाइड्रोपोनिक्स पर तेजी से ध्यान देने की आवश्यकता





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