संसदीय समिति ने मंगलवार को पर्यावरण मंत्रालय को फटकार लगाई कि उसने वित्तीय वर्ष 2024–25 में प्रदूषण नियंत्रण योजना के ₹858 करोड़ के बजट में से अब तक 1% भी खर्च नहीं किया। गंभीर प्रदूषण संकट के बावजूद योजना की मंजूरी में देरी को वजह बताया गया, जिसे समिति ने अस्वीकार्य माना।
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- ₹858 करोड़ में से केवल ₹7.22 करोड़ खर्च हुए जनवरी 2025 तक।
- योजना का उद्देश्य—वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण।
- खर्च न होने पर संसद में समिति ने चिंता जताई।
- मंत्रालय ने योजना की मंजूरी लंबित होने को कारण बताया।
- समिति ने इसे “गंभीर उपेक्षा” और फंड की भारी बर्बादी करार दिया।
- ₹858 करोड़ मंत्रालय के वार्षिक बजट का 27% से अधिक है।
- समिति ने कहा—दिल्ली ही नहीं, देशभर के शहर प्रदूषण की चपेट में।
- बढ़ते AQI से लोगों की सेहत और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा।
- मंत्रालय से शीघ्र निर्णय और कार्य योजना लागू करने की मांग की गई।
- समिति ने इस देरी को गंभीर पर्यावरणीय संकट का जवाब देने में विफलता बताया।





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